वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर नही है थक कर बैठ गये क्या भाई मन्जिल दूर नही है चिन्गारी बन गयी लहू की बून्द गिरी जो पग से चमक रहे पीछे मुड देखो चरण-चिनह जगमग से बाकी होश तभी तक, जब तक जलता तूर नही है थक कर बैठ गये क्या भाई मन्जिल दूर नही है अपनी हड्डी की मशाल से हृदय चीरते तम का, सारी रात चले तुम दुख झेलते कुलिश का। एक खेय है शेष, किसी विध पार उसे कर जाओ; वह देखो, उस पार चमकता है मन्दिर प्रियतम का। आकर इतना पास फिरे, वह सच्चा शूर नहीं है; थककर बैठ गये क्या भाई! मंज़िल दूर नहीं है। दिशा दीप्त हो उठी प्राप्त कर पुण्य-प्रकाश तुम्हारा, लिखा जा चुका अनल-अक्षरों में इतिहास तुम्हारा। जिस मिट्टी ने लहू पिया, वह फूल खिलाएगी ही, अम्बर पर घन बन छाएगा ही उच्छ्वास तुम्हारा। और अधिक ले जाँच, देवता इतन क्रूर नहीं है। थककर बैठ गये क्या भाई! मंज़िल दूर नहीं है।

Types of problem in prog. contest October 1, 2009

Filed under: Programming Contest — whoami @ 23:08

there are only 16 types of programming contest problems! Furthermore, the top several comprise almost 80% of the problems seen at the IOI. Here they are:

* Dynamic Programming
* Greedy
* Complete Search
* Flood Fill
* Shortest Path
* Recursive Search Techniques
* Minimum Spanning Tree
* Knapsack
* Computational Geometry
* Network Flow
* Eulerian Path
* Two-Dimensional Convex Hull
* BigNums
* Heuristic Search
* Approximate Search
* Ad Hoc Problems

The most challenging problems are Combination Problems which involve a loop (combinations, subsets, etc.) around one of the above algorithms – or even a loop of one algorithm with another inside it. These seem extraordinarily tricky to get right, even though conceptually they are “obvious”.

If you can master solving just 40% of these problem types, you can almost guarantee a silver medal at the IOI. Mastering 80% moves you into the gold range almost for sure. Of course, `mastery’ is a tough nut to crack! We’ll be supplying a plethora of problems so that you can hone your skills in the quest for international fame.

source-baidu blog